मै

"जीवन के हर विषम संघर्ष मे अगर परिणाम देखोगे तो तुम्हारा कल तुम्हारी सोच से उतना ही दुर हो जाएगा..जितना ओस की बुन्दो का ठहरावपन"..
दुर्गेश 'सोनी'

Monday, 13 June 2011

इन्तजार

अकेली ओट मै छुपकर यु देखना बन्द कर
आहट को सुनकर यु आइने पे जाना बन्द कर
देखकर इस ख्याल को
"वो वासव का रंग मेरा ही तो है"
हाथो को तेरी हंसी से यु लगाना बन्द कर
समय का भ्रम है जो पाया तुने
अवसरो की महानता
नदीयो का रुखापन
सुरज का तेज
ये सब झिलमिलाते आशिक है
मेरे कहने को यु नजर अन्दाज मत कर...
टुटा हुआ दिल फ़िर से जुड जाएगा
वो उस हसी के साथ वापस आएगा
सपनो मै ये सोचना बन्द कर

 दुर्गेश 'सोनी'

No comments:

Post a Comment