मै

"जीवन के हर विषम संघर्ष मे अगर परिणाम देखोगे तो तुम्हारा कल तुम्हारी सोच से उतना ही दुर हो जाएगा..जितना ओस की बुन्दो का ठहरावपन"..
दुर्गेश 'सोनी'

Saturday, 15 October 2011

पत्थर

ये रियासत बहुत पुरानी है/
पत्थर की ठोकर इश्क़ निशानी है..

खन्जर चलते नही यहा रो जाते है
कत्ल के गुनाह मे कुछ खो जाते है..

शाम सवेरे उलझन का जाल मुहब्ब्त मे
इस गुनाह मे हर रात जुगनु फ़स जाते है..

खुदा हमको यु बरकत से ना नवाजे
इस मस्जिद के हर नमाजी हस जाते है..

चन्द खतो को हम महकशी समझने लगे
ये गुलामी का इतिहास है शब कुछ कह जाते है..



---दुर्गेश

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