मै

"जीवन के हर विषम संघर्ष मे अगर परिणाम देखोगे तो तुम्हारा कल तुम्हारी सोच से उतना ही दुर हो जाएगा..जितना ओस की बुन्दो का ठहरावपन"..
दुर्गेश 'सोनी'

Thursday, 20 October 2011

मुहब्ब्त

मुहब्ब्त
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छोटी सी मुहब्ब्त हर हया मे गुनाह छिपाए रखती है
एक अनजान को खामोशी से बेजुबान बनाए रखती है...

रस्तो के दरमिया आकाश का बहना एक बहाना है
ये अपने आप को मुफ़लिसो मे दिवान सा बनाए रखती है....

कि अंधेरा अपने फ़क्र पर है जुगनू समन्दर सा डोल रहे
मै खो जाउना इस इनायत मे अपने को सवेरा बनाए रखती है....

खुदा नवाजिस गुलाब जर्रे सा ये दिल महकता रहता है
ये इश्क के मौसम मे हर उम्र को बगिया बनाए रखती है...

--दुर्गेश

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